लोकसभा चुनाव होने में अभी थोड़ा समय है लेकिन सभी पार्टियां वोटरों को अपने अपने पाले में खींचने में अभी से लगी हुई हैं। जहां एक तरफ विपक्षी गठबंधन अभी पार्टियों को जोड़ने और सीटों के शेयरिंग फार्मूले पर काम कर रहा है वहीं भाजपा और सहयोगी पार्टी जमीनी स्तर पर वोटरों को जोड़ने का काम कर रही है। भाजपा की सहयोगी पार्टियां भी अपने और गठबंधन के बेस को मजबूत करने के लिए अपने प्रयास कर रही हैं। इसी कड़ी में भाजपा की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले ) भी जन अधिकार रैली के माध्यम से पश्चिम के पिछडे मतदाताओं पर फोकस कर रही है। वेस्ट यूपी के पिछड़े मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आगामी 1 अक्टूबर को मेरठ में जनअधिकार रैली का आयोजन किया जा रहा है। इस रैली में आरपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री डॉ0 रामदास आठवले के अलावा उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या भी शामिल होने वाले हैं। मेरठ के सांसद एवं राज्यसभा सदस्य भी इस रैली में शामिल होंगे।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता ने एक प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व आरपीआई उत्तर प्रदेश में तीन बड़ी रैलियां करेगी। पहली रैली मेरठ में, दूसरी लखनऊ और तीसरी गोरखपुर में होगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब को मानने वाला एक बड़ा वर्ग है और वह बसपा की नीतियों से तंग आ चुका है। इसलिए वह बसपा से निराश होकर आरपीआई से जुड़ रहा है। आरपीआई बहुजन, शोषित, वंचित, पिछड़े समाज को राजनीतिक और सामाजिक रूप से जागरूक करके उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही है। समतामूलक समाज के निर्माण के लिए पार्टी कर रही है। सपा-बसपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने परिवारवादी पार्टी करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा का चरित हमेशा से दलित विरोधी रहा है। प्रोन्नति में आरक्षण का बिल फाडने वाली सपा ने दलितों का कोई भला नहीं किया है। रैली में मेरठ सांसद राजेन्द्र अग्रवाल एवं राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत वाजपेई भी उपस्थित रहेंगे।
दरअसलए इस जन अधिकार रैली के बहाने भाजपा की नजर पश्चिमी यूपी के 37-53ः % ओबीसी वोटर पर है जो 2014 की तरह 2024 में वेस्ट यूपी में भाजपा को बड़ा सहारा दे सकता है। इनका वोट हासिल कर भाजपा 2014 की तरह एक बार फिर लोकसभा का मैदान फतह करने की प्लानिंग में है। पश्चिमी यूपी में जन अधिकार रैली के पीछे पिछड़ों की राजनीति के मायने समझते हैं।
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