मेरठ। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नोडल एजेंसी इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी के तत्वाधान में एमआईटी मेरठ में चल रही राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में युवा वैज्ञानिकों ने महिला स्वास्थ्य एवं कौशल विकास पर अपने प्रोजेक्ट पेश किए।
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस स्वास्थ्य और कल्याण विषय के अंतर्गत पारिस्थितिकी तंत्र को जानना, स्वास्थ्य पोषण एवं कल्याण को बढ़ावा देना, पारिस्थितिकी तंत्र और स्वास्थ्य के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रथाएं, आत्मनिर्भरता के लिए पारिस्थितिक तंत्र आधारित दृष्टिकोण, परितंत्र और स्वास्थ्य के लिए तकनीकी नवाचार पर पांच समानांतर सत्रों में विभिन्न जनपदों से आए बाल वैज्ञानिकों ने अपने प्रस्तुतीकरण दिया तथा स्थानीय वातावरण, पारिस्थितिकी तंत्र, स्वास्थ्य एवं आरोग्यता, पोषण, कृषि में नवाचार, जनकल्याण हेतु नवाचारी प्रयोग, स्वास्थ्य कल्याण हेतु सहायक व सांस्कृतिक प्रथाएं, महिला स्वास्थ्य, कौशल विकास, स्थानीय समस्याओं का निराकरण आदि से संबंधित प्रकरणों पर प्रोजेक्ट का निर्माण किया तथा शोध परक प्रस्तुतीकरण दिये।

भारत सरकार के इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों को ऐसा मंच प्रदान करना है जहां वह अपने शोध कार्य को प्रदर्शित कर सकें व अपने खोज एवं ज्ञान की प्यास को तृप्त कर पाएं। युवा पीढ़ी अपने आसपास की समस्याओं को जानने समझे एवं विज्ञान विधि से समस्याओं को हल करने की दिशा में सीखने-समझने का प्रयास करें। अनुसंधान आधारित सीखने का यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष एक विशिष्ट मुख्य विषय पर मनाया जाता है जो लगातार 2 वर्षों तक के लिए होता है जिसका निर्धारण स्थानीय से वैश्विक के मूल सिद्धांत पर आधारित होता है।

नोडल एजेंसी इस्कास के कार्यकारी सचिव डॉ. वी पी सिंह ने कहा है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की प्राथमिकता है कि देश का प्रत्येक बच्चा वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़े तथा उसमें अनुसंधान एवं नवाचार की भावना को विद्यालय स्तर से ही डाला जाए। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार का यह कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक एवं सरकार की प्राथमिकता में है।
इसी दौरान शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए इन्नोवेशन लैब्स तथा आइडिया लैब में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। एसीआईसी में डॉ. सारस्वत के निर्देशन में कैड डिजाइनिंग व स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग बच्चों ने सीखी तथा बेसिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कैसे काम करती हैं उनके बारे में भी सीखा। इसके साथ ही एआईसीटी आइडिया लैब में डॉ. गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में लेजर कटर के सॉफ्टवेयर कैसे काम करते हैं उन्हें रन कैसे किया जाता है, यह सभी टीचर ने कार्यशाला के दौरान सीखा।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी- नोडल एजेंसी के कार्यकारी सचिव डॉ. वीपी सिंह, बाल विज्ञान कांग्रेस पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रदेश समन्वयक दीपक शर्मा, गीता सचदेवा, संजना आदि का सराहनीय योगदान रहा।


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