मेरठ। मैन्युअल स्कैवेंजर्स के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम 2013 को लागू हुए एक दशक लंबा समय होने को है लेकिन उसके बावजूद हाथ से मैला ढोने की परंपरा आज भी कायम है और इससे जुड़े लाखों लोगों का जीवन हर समय खतरे में रहता है। यही कारण है कि देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा में आज भी असुरक्षित ढंग से नाले सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई मैनुअल रूप से किए जाने के कारण हर साल करीब 70 लोग मौत का शिकार हो जाते हैं। राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य जयंत चौधरी ने विगत दिनों राज्यसभा में इस मुद्दे को प्रमुख रूप से उठाते हुए पिछले 5 साल में विभिन्न राज्यों में हुई मौतों का आंकड़ा भी सदन के सामने रखा। इसी आंकड़े से यह तथ्य निकलकर भी सामने आया कि पिछले 5 सालों में देश के 20 राज्यों में करीब 352 लोग दुर्घटनाओं का शिकार होकर मौत के मुंह में समा गए। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले 5 सालों के दौरान उत्तर प्रदेश में 57 लोग, तमिलनाडु में 46 लोग, राजधानी दिल्ली में 42, हरियाणा में 38, गुजरात में 28, महाराष्ट्र में 32, कर्नाटका में 26, पश्चिम बंगाल में 16, पंजाब में 15, आंध्र प्रदेश में 11 लोग सीवर अथवा सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दुर्घटनाओं का शिकार हुए।
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